गीत - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

गीत


{(बेटी अछि अहाँक गौरब भैया)-२
सुनू मिथिलाकेँ सभ मैया }-२
बेटी अछि भविष्य हमर समाजक
(नहि वेटीकेँ निरसाउ हे दैया )-२

(किएक बेटा बचैपर अहाँ उतरलहुँ)-२
यौ बेटाकेँ बाबू
बिन बेटीकेँ कोना चलत
ई देश समाज बताबू
नै बनू निर्लज्य अहाँ
काइल्ह अहुँ अपन बेटी बियाहब
जागू जागू यौ बेटीक बाबू
भाइ बहिन आ माए सब जागू

किएक मोटरी बुझि नैन्हेंटामे
बेटीक वियाह करेलहुँ
देखू ओकर जिनगीकेँ
घोर नरकमय बनेलहुँ

आब नै एहेन गल्लती करब
बेटीकेँ शिक्षित करब
माथ उठा कए ओहो चलेए
एहन सभसँ विनती करब

{(दहेज रूपी दानबकेँ हम सभ)-२
मिल कए आब जड़ाबी }-२
जे कियो दहेज माँगथि
हुनका बेटा सहीत भगाबी

(चाही त’ बेक साउंड आ आन्तरा पर नीचांक देल लाइनक प्रयोग सेहो कए सकैत छी )    
जय हो ........
जय हो .........
जय हो मिथिलाकेँ बेटीकेँ
जय हो मिथिलाक नव समाज
जय हो .....  जय हो ......      

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जगदानन्द झा 'मनु'