नुकाएल बलात्कारी रूप - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 24 दिसंबर 2012

नुकाएल बलात्कारी रूप





हरेक मर्दक भित्तर नुकाएल रहैत छै एकटा बलात्कारी रूप
जकरा चाही समय आ सहयोग,

आ हरेक घटनाकेँ पछाति
बदलि जाइ छै दृष्टिकोण महिलाक
चाहे ओ हमर माए-बहीनि होथि की महिला सहकर्मी वा की बाटपर चलैत कोनो अन्य स्त्री
ओकरा सभ लेल घटनाक पछाति कोनो सम्बन्ध इयाद नै रहै 
आ रहै जाइ छै मोन जे हम स्त्री छी आ ओ पुरुष

माए-बहीनि सेहो कनछिया कए देखए लगैत अछि
आ महिला सहकर्मी सेहो....
ओना हमर माए-बहीनि केर परिवेश
आ हमर महिला सहकर्मी केर परिवेश भिन्न छै मुदा एहन घटनाक पछाति
ओकर सभहँक मनोवृति एकै भए जाइत छै


हरेक स्त्री केर नजरिमे बनि जाइत छी अपराधी सन
आ नै रहि जाइए घमण्ड अपन मोछपर
लगैए जे जँ लागि जेतै आगि मोछमे तँ कतेक नीक रहितै
आ पहिल बेर हमरा अपन मोछपर घृणा होइए

आ हम कहियो ने कहि सकै छी जे बलात्कारी हम नै छी दोसर पुरूष छै
कारण ई अपन जिम्मेदरीसँ भागब हएत 
हँ हम आइ इ स्वीकार करै छी जे हरेक मर्दक भित्तर नुकाएल रहैत छै एकटा बलात्कारी रूप

हम अपनाकेँ साधू-महात्मा बनेबाक लेल हरेक स्त्रीकेँ माए-बहीनि नै कहबै
मुदा हे स्त्री अहाँ जै स्वरूपमे हमरा लेल छी
चाहे माए-बहीनि रूपमे वा प्रेमिका, पत्नी, बाटपर चलैत आन कोनो वा 
हरेक रातिमे जागि क' अपना माथापर वेश्याक चिप्पी सटने
आइ हम लज्जित छी अपन मर्द होमएपर
हम समवेत रूपसँ माफी मँगैत छी अहाँ सभसँ