विहनि कथा-हाउ(मुखौटा) - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 12 दिसंबर 2012

विहनि कथा-हाउ(मुखौटा)

विहनि कथा-हाउ(मुखौटा)

मनोहर बाबूकेँ के नै चिन्है छै?समाजकेँ दहेज मुक्त करबाक संकल्प लेने छथि मनोहर बाबू ।कतेको बेर ,कतेको मंचसँ दहेजक विरोधमे भाषण देने छथि ।दहेज लेनाइ-देनाइकेँ सबसँ पैघ पाप बुझै छथि ।

आइ इलाका भरिमे हुनक नामक चर्चा छै ।जनताक नजरि हुनक जेठ बेटाक विआहक कार्डपर छै । कार्डपर की रहतै ,ओहिपर छपल एकटा पाँतिपर टकटकी लगेने छै लोक ।जे पाँति छल "ई विआह दहेजक दानवी क्रियाकलापसँ कोसों दूर अछ
ि ।"

मनोहर बाबूक घरपर कऽर-कुटुमक भीड़ जुटल छै आ मनोहर बाबू दुनू प्राणी एकटा घरमे बतियाइत छथि ।

मनोहर बाबू-"इ विआह आइ हेबाक अछि मुदा लागि रहल छै जे नै हएत ।"

पत्नी-"से किएक ? विआह किए नै हेतै?"

मनोहर बाबू-"साँझक चारि बाजि गेलै मुदा तीलकक 12 लाखमेसँ 50 हजार टाका एखनो बाँकिए अछि ।"

अमित मिश्र