0

जुनि हमरा जकरु महामाया, मायक भूमि बजा रहल अछि
जाहि माटिकेँ  देह बनल हमर, ओमाटि  बजा रहल अछि

रुन-झुन संगी-साथीक हमरा, इआद बहुत सता  रहल अछि
काका-ककिक मधुर वोल, कानमे घंटी बजा रहल अछि

जुनि हमरा जकरु महामाया, मायक भूमि बजा रहल अछि
सोंधी-सोंधी मुरहीक खुशबू, गामक हमरा खीच रहल अछि

कनियाँ-काकीक कडकड कचड़ी, मोनकेँ  डोला रहल अछि
लहलह झुमैत खेतक धान, शीश हिला कए  बजा रहल अछि

चौरचन, छठिक सनेसक स्वाद, हमरा कचोति रहल अछि
हुक्का-लोलिक उक जे फेकल, सुमैर हमरा कना रहल अछि 

नहि  सहिसकैत छी दुरी एतेक आब, ह्रदय-बांध टूट रहल अछि
जुनि हमरा जकरु महामाया, मायक भूमि बजा रहल अछि

*****
 जगदानन्द झा 'मनु'


मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035