- मिथिला दैनिक

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बुधवार, 4 अप्रैल 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट



गीत-

जहिया सँ देखलौं हम हुनकर सुरतिया
ईआद आबैय ओ हमरा आधी आधी रतिया
पूर्णिमा के पूनम सन हुनकर सुरतिया
हुनके रूप सँ होएत छैक सगरो ईजोरिया

चम् चम् चमकैय छै ओ जेना अगहन के ओस
नैयन मिलल हुनका उडिगेल हमर होस
छम छम बजबैत पाएल ओ लग हमरा आएल
देख कS हुनक अधर उर्र भS गेलौं हम घाएल

मधुर बोली हुनक मादकता सं भरल जोवन
हिरन के चाल हुनक चंचल चितवन
अंग अंग सोन हुनक सूरत हिरामोती
हुनक स्पर्श सं भेटैय आन्हर के ज्योति

गाल हुनक लागैय जेना सुभ प्रभातक लाली
ठोर हुनक लगैय जेना मदिरा कें पियाली
मटैक मटैक चलनाए जेना मधुमासक पवन
सपना में आबी करै छथि ओ हमरा सं मिलन

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट