प्रेम नै जहर छै - मिथिला दैनिक

Breaking

शनिवार, 14 अप्रैल 2012

प्रेम नै जहर छै

बड हिम्मत क एकटा खिस्सा लिखवाक कोशिश केलौं | हम्मर मैथिली मे पहिल कहानी अछि . विषय कोनो नव नै अछि मुदा हम अपना तरीका सँ लिखबाक भरिसक कोशिश केने छी |
आशा करै छी जे अहांके नीक लागत |

                                                        *** प्रेम नै जहर छै ***

एकटा गाम | मननपुर | भोरक समय | गामक बीच दुर्गा मंदिर सँ उठैत नारी स्वर , गीतक एहन प्रवाह लगे छल जे स्वयं सरस्वती कमलक आसन पर बैस अपन हाथक वीणा संग मधुर भजन गाबि रहल छथिन | यैह भजन " जय जय भैरबी .........." सँ ऐ गामक मनुष्य आ अपन अंखि खोलै छथि | आब फरिच्छ भs गेल छै | किसान अपन बरदक संग खेत दिश चललाह |बरदक घेट मे बान्हल घंटी , ओही मधु भरल स्वर संग ताल -में ताल मिलायवाक भरिसक कोशिश कs रहल छै | भोर सात बजे एहि गाम सँ ओही नारी के पहिल भेंट होई छै | किरण , जी हाँ ,किरण नाम छै ओकर | सोलह -सत्रह वर्ष के घेट लगेने , मानु कोनो आधा खिलल गुलाबक कली | यौवनक चिन्ह आब उजागर होबs लागल छै | सुन्दरताक चलैत-फिरैत दोकान । ककरो सँ कोनो उपमा नै अनुपम । एकदम मासुम मुँह ,समाजक रीति-रिवाज सँ अंजान ।गाम मे सबहक चहेती ।कोनो काज एहन नै जे ओ नै क' सकैए ।सब काज मे पारंगत ,किरण ।

" किरण ,गै किरण ,कतS चल गेलही ,स्कुलक देर भs रहल छौ ", सुलोचना टिफिन बन्न करैत किरण कए सोर केलखिन ।

" आबै छियौ ,बस दू मिनट ", कहैत किरण घर सँ बहरायल ।कनेक काल ठमकि ठोर पर मुस्की नचबैत बाजल ," माँ आइ कने देर सँ एबौ ,आइ ने हमर सहेली पिंकी कए जनमदिन छै ,"
आ इ कहैत साइकिल लs स्कूल दिश चल देलक ।

स्कूल मे एकटा लड़का छलैए ,राकेश, पढ़ै-लिखै मे गोबरक चोत ,मुदा पाइबाला बापक एकलौता बेटा ,से पाइ कए गरमी जरूर छलैए ।सब साल मास्टर कए दु टा हजरीया दs दै आ वर्ग मे प्रथम कs जाए ।एक नम्मर कए उचक्का ।ओ जखन-तखन किरण कए देखैत रहैए ।आब किरण गरीब घरक सुधरल बेटी ,ओ की जानS गेलै ,जे कनखी कए अर्थ की होइ छै ।जहिना आन सब छात्र-छात्रा राकेशक किनल चाँकलेट ,मलाइबर्फ ,बिस्कुट आदि अनेको चिज सब खाइ छल ओहिना किरणो बिना छल-प्रपंच कए राकेशक संग रहै छल ।इम्हर किछ दिन सँ राकेश मंहगा सँ मंहगा आ सुन्नर सँ सुन्नर चिज-बित सब आनि कs किरण कए
चुप्पे-चाप दै छलै ।जै अवस्था मे एखन किरण छल ओहि मे विपरीत लिंगक प्रति आकर्षण भेनाइ स्वभाविक छै ,आ जौँ पैसा कए गमक लागि जाए तs फेर बाते कोन छै । इएह कारण छै जे राकेशक संग आब नीक लागS लागलै । राकेशक जादु एहन चलले जै मे फँसि पढ़ाइ-लिखाइ सब पाछु छुटि गेलै आ मस्ती हावी भ' गेलै । ऐ आकर्षण कए नाम देलक "प्रेम" । प्रेम ,जाहि शब्दक एखन धरि कोनो उपयुक्त परिभाषा नै भेटल । प्रेम ,जकरा बेरे मे जतेक लिखब ततेक कम ।प्रेम ,शायरक तुकबंदी ,दिल कए मिलन ।प्रेम , जे मौत सँ लड़बाक साहस दै छै । लैला-मजनु बाला प्रेम भेल छलै अकी किछु और जानी नै ।

" आउ ,आउ , आइ बड़ देर कs देलियै ," किरण कए आबैत देख राकेश बाजल ।
" हाँ ,की करब साइकिल पंगचर भ' गेल छल " किरण जबाब देलक ।
राकेश मक्खन लगाबैत बाजल ," आहा , हम्मर जान कए आइ बुलैत आबS पड़लै . . . काल्हि चलब नवका स्कुटी किन देब . . . तखन नै ने कोनो दिक्कत ।"
किरण मुस्कुराइत बाजल ," दुर जाउ ,स्कुटी पर चढ़बै त' गामक लोग की कहतै । कहतै जे छौड़ी बहैस गेलै ।"

" लोग किछु कहैए कहS दियौ ,अहाँ बताबू वेलेंटाइन डे अबि गेल छै गीफ्ट की लेबै ," राकेश एक्के साँस मे बाजल ।
" हम किछु नै लेब ,जखन प्रेम केलौ आ बियाह करबे करब तखन अहाँक सब किछ अपने आप हम्मर भ' जेतै ," किरण विश्वास के साथ बाजल ।

कनेक काल मौन ब्रत कए पालन केला कए बाद राकेश किरणक हाथ पकरैत बाजल ," किरण ,हम चाहै छी ऐ बेर वेलेंटाइन डे पर दरभंगा घुमै लेल चलब । जौं अहाँ कहब त' एखने होटल बुक करबा दै छी " फेर कने और लग आबि बाजनाइ शुरू केलक ." ओतS खुब मस्ती करब ,फिलम देखब आ राज मैदान मे पिकनिक मनायब आओर बहुतो रास गप्प करब ।"

किरण अपन हाथ छोड़बैत बाजल ," नै नै हम असगर अहाँ संग दरभंगा नै जायब । माँ हम्मर टाँग तोड़ि देत , अहाँ जायब त' जाउ हम एतै ठिक छी ।"

" हे . . .हे . . . हे . . . हे . . . एना जुनी बाजु " राकेश किरण कए पँजियाबैत बाजल ," हम अहाँ होइ बाला घरबाला छी आ पति संग घुमै मे कोन हर्ज छै , मात्र एक्के दिन कए त' बात छै , अहाँ कोनो बहाना बना लेब ।"

जेना-तेना क' राकेश अप्पन बात मना लेलक ।तय दिन किरण आ राकेश शिवाजीनगर सँ बस पकैड़ दरभंगा दिश चल देलक । भरि रस्ता प्यार-मोहब्बत कए बात बतियाइत रहल । दरभंगा आबि राज किला देखलक ,श्यामा मंदिर ,मनोकामना मंदिर मे पुजा केलक , टावर चौक सँ शाँपिँग केला कए बाद साँझ होटल मे आयल ।

आब एक कमरा ,एक बेड ,दु जन ।बड़ मुश्किल घड़ी छलै ।
राकेश कहलक ."आउ कने सुस्ता लै छी ,काल्हि भोरे एहि ठाम सँ विदा हएब ।"
किरण प्यार कए कारी पट्टी सँ अपन आँखि बान्हि लेने छलै ।बिना किछु बाजने ओ सब करैत गेल जे राकेश चाहै छलै ।जौं कखनो बिरोधो करै त' प्रेमक दुहाई दs राकेश मना लै छलैए ।और अन्ततः ओ भेलै जे नै हेबाक चाही ।प्रेमक मायाजाल मे फसल प्रेमक मंत्र सँ वशिभुत कएल किरण किछु नै बाजल .शायद अप्पन प्रेम पर हद सँ बेसी विश्वास छलै । भोरे नीन खुजलै तs अपना आप कए असगर देखलक । कनेक काल प्रतिक्षा केलक मुदा राकेशक कोनो अता-पता नै छलै । काउन्टर पर सँ पता चललै जे राकेश तs तीन बजे भोरे चल गेल छलै ।

आब बुझु किरण पर बिपत्ती कए पहाड़ टुटि पड़लै । बिभिन्न तरहक बात मोन मे आबै ।माँ कए की कहब .आगु जीवन कोना काटब ,लोग की कहतै ।सोचैत-सोचैत मोन घोर भs गेलै । गाम दिश जायबाक लेल डेगे नै उठै । कतS जायब ,की करब । चलैत-फिरैत लहाश भs गेल छलै किरण । भीड़-भाड़ मे रहितो एकदम तन्हा ।मनक तुफान रूकबे नै करै । बेकार , जीवन बेकार भs गेलै ।सबटा सोचल सपना क्षण मे टुटि गेलै । सोचै ,माँ कए अफसर बनि कs के देखेते , भगबती कए गीत के गेतै ।

एतेक दिन दुर्गा माँ कए पुजा केलौ... तकर इनाम इ भेटल ।....सब झुठ छै ,... देवी-देवता सब बकबास छै ..... गरीबक साथ कोनो देवी-देवता नै दै छै ।...... सब कहै छै ,. प्रेम बड़ नीक शब्द छै ,..........प्रेम सँ पत्थर दिल मोम भs जाइ छै ,.....मुदा नै....... ,प्रेम तs जहर छै ,जहर ... जै सँ केवल मौत भेटै छै ,मौत कए सिवा किछु और नै ,मौत . . . मृत्यु . . . .मौत . . .जहर . . . । हम जानि-बुझी कs इ जहर पिलौँ ।........ हम अपवित्र छी , हम कुलक्षणी छी ......., हम धरती परक बोझ छी ......हमरा जीबाक कोनो अधिकार नै । हमरा सन के लेल ऐ दुनिया मे कोनो जगह नै । ............हम माँ-बाप कए इज्जत और निलाम नै करब ।......हम मरि जायब , ककरो किछु खबर नै हेतै । ......हम अप्पन बलिदान करब ।अनेको रास बात सँ माँथ लागै फाटि जेतै । ओ एक दिश दौड़ल ,किम्ह
 .से ओकरो नै पता , ओ कतS जा रहल छै ....., नै जानी । ....दोड़ैत-दौड़ैत भीड़ मे कत्तो चल गेलै । अप्पन अन्जान मंजील दिश ।

भोरे आखबारक मुख्य पृष्ट पर मोट-मोट अक्षर मे लिखल छल " सोलह-सतरह साल कए एकटा गोर-नार युवती रेलवे पटरी पर दू टुकड़ी मे भेटल ।नाम-गाम कए पता नै चलल अछि । पोस्टमार्टम कए लेल लाश भेज देल गेलै यै । अंतिम दाह-संस्कार पुलिसक निगरानी मे होयत . . . । ।

                                                                        { समाप्त }

ऐ कहानी कए घटना .पात्र .नाउ सब काल्पनीक अछि । कोनो सत्य घटना सँ प्रेरीत नै छी ।हम्मर उद्येश्य किनको ठेस पँहुचयबाक नै छल । हम ओ सब नवयुवक-नवयुवती ,जे प्रेमक सागर मे डुबकी लगेने छथि वा लगाबS चाहै छि , सँ कहS चाहब जे प्रेम खराब नै छै ,लेकिन प्रेम सोचि-समैझ कए करबाक चाही । बिना सब किछ जानने एकांत मे नै जायबाक चाही ।
पाठकगण , जौ कत्तौ कोनो गलती बुझाए त' हमरा कहब हम सुधारबाक कोशिश करबै । ऐ मे कत्तौ-कत्तौ आन भाषाक शब्दक प्रयोग भेल हेतै आ टाइपिंग मे गलती भ' सकै छै । तै लेल क्षमा चाहब । केहन लागल से जरूर बतायब । अहाँक

                                   
अमित मिश्र