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गजल@प्रभात राय भट्ट



गजल

सुन्दर शांत मिथिला में मचल बबाल छै
जातपात भेदभावक उठल सबाल छै

नहि जानी किएक कियो करैय भेदभाव
सदभाव सृजना केर उठल सबाल छै

मनुख केर मनुख बुझैय छुतहा घैल
उंच नीच छुवाछुतक उठल सबाल छै

डोम घर में राम जी केनेछ्ल जलपान
ओहू पर कहियो कोनो उठल सबाल छै

सबरी क जूठ बैर सेहो खेलैथ राम जी
ओहू पर कहाँ कहियो उठल सबाल छै
............वर्ण-१६..........
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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