गजल - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 3 जनवरी 2012

गजल


आबि गेलै बहुत मस्ती थोड़बे पीबि कऽ।
आब डोलै सगर बस्ती थोड़बे पीबि कऽ।

जे करी, की करत थौआ भेल छै लोकक,
खूब हेतै जबरदस्ती थोड़बे पीबि कऽ।

चोरबा केँ चलल डंटा, साधु बैसै चुप,
हैत आगू मटर-गश्ती थोड़बे पीबि कऽ।

बाजबै जे मुँहक छै, चाहे कहू मातल,
की कहू छै मुँहक सस्ती थोड़बे पीबि कऽ।

आब नेता बनि खजाना लूटबै देशक,
"ओम" केँ की बढल हस्ती थोड़बे पीबि कऽ।
------------- वर्ण १५ ----------------
वर्ण क्रम I U I I U U U I I I U I I U U