- मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 3 जनवरी 2012


गजल @प्रभात राय भट्ट

             गजल
उईर जो रे पंक्षी नील गगन में
ल चल हमरो स्वच्छंद पवन में

जतय नै छैक कोनो सालसिमाना
उडैत रहब स्वच्छंद पवन में

रोईक सकत नै  टोईक सकत
जे कियो हमरा स्वच्छंद पवन में

करी बादल गर्जत मेघ पडत
रमन करब स्वच्छंद पवन में

करब दुरक दृश्य अवलोकन
मोन मग्न रहब नील गगन में

विचरण करी हम जनजन में
इच्छा "प्रभात"क मोन उपवन में
................वर्ण:-१३...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट