0

गजल @प्रभात राय भट्ट

             गजल
उईर जो रे पंक्षी नील गगन में
ल चल हमरो स्वच्छंद पवन में

जतय नै छैक कोनो सालसिमाना
उडैत रहब स्वच्छंद पवन में

रोईक सकत नै  टोईक सकत
जे कियो हमरा स्वच्छंद पवन में

करी बादल गर्जत मेघ पडत
रमन करब स्वच्छंद पवन में

करब दुरक दृश्य अवलोकन
मोन मग्न रहब नील गगन में

विचरण करी हम जनजन में
इच्छा "प्रभात"क मोन उपवन में
................वर्ण:-१३...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035