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मनुखक जिनगी भोग विलास सुख एश्वर्य प्राप्तिक लेल  सापेक्ष जीवन थिक मुदा अज्ञानताबस किछ मनुख भोगमे स्वयं भुक्त भोजैतछ एकटा एहने कथा अपने लोकनिक समक्ष परोईस रहल छि--------
श्रीराम शर्मा एकटा ब्यापारी छलाह हुनका परिवारमें पत्नी,बेट्टी आ आकाश विकाश दू टा सुपुत्र छलाह हुनक यी पांच सदस्य परिवार एकटा नामुनक रुपमे गनल जाईतछल पत्नी बेट्टा बेट्टी सभगोटे  संस्कारी छलहीन बड हंसी खुसी क संग हुनक जीवन बितरहल छल ! समय क संग संग जेष्ठ बेट्टा आ बेट्टी क विआह सेहो भोगेलैय दू चईर सालक बाद श्रीरामजी सोचलैथ  विकाशक विआह आब  सेहो क देलजाए आ  हम अपन  जिमेबारी  सं  मुक्त  भोजईब  यही  सन्दर्भ  में  सपरिवार  सं  विचारविमर्श  केलैथ आ  सभक  सहमती  क बाद विकाश  सं  फ़ोन  पैर  बातचीत  केलैथ ! बौआ विकाश हमरा  लगायत  सबहक विचार अछि आब अहांक बिआह सेहो क देलजाए की विचार ऐछ अहांक से कहू ? मुदा विकाश अपन असहमति जनौलक बाबूजी हम अखन पढाई क रहल छि पढाई समापन होबैदीय तकरबाद हम विआह करब ! विकाश ई समय  कलेजमें अध्यनरत छात्र छथि विकाश एकटा सुन्दर आकर्षक एवं बलिष्ठ देहक धनि छैथ हुनक हाउ भाऊ एवं मनमोहक ब्यबहार सं फिमेल क्लास मैट सभ विकाश सं दोस्ती कर लेल इच्छुक रहैछ्थी ! एईही क्रममें विकाश कय एकटा लड़की  निषा   सं प्रेम भोजाईतअछ दुनूक बिच शारीरिक संबन्ध सेहो भोजईतअछ लगभग एक वरख तक दुनूक बिच इ सम्बन्ध कायम रहैय ! एक दिन विकाश आ निषाक बिचमे किछ मनमोटाब बैढ़ जाईतअछ आ विकाश तनाबग्रस्त अब्स्थामे रहैलागैय ताहि समयमे विकाशक नजैर एकटा सुन्दर सुडौल उर्वर जोवन आकर्षक अधर कंचन काया चमकैत पुर्नमासिक चाँद सन  युवती जुली  पैर पैइरजाईए विकाशक मोन जुली संग भोग  विलाश    करबाक  लेल  ललाईत भोजैइए विकाश अपन माया जाल बिछ्नई आरम्भ कदैय आ विचारी ओ युवती अपन जिनगी क मालिक विकाश कय बनादैय !विकाश भोग विलाश क महत्वाकांक्षी युवा अपन तृष्णा मेटाब में कनियो देर नहीं करईत जुलिक उर्वरजोवन क रसपान केनाई सुरु कदैय ! जुली संग यी शारीरिक सम्बन्ध अनवरतरूप सँ चलए लगैय इ बातक  खबैर निषा कय सेहो पता चैलजैइए  बेचारी निषा जिनका सँ प्रेम केने छल ओ एहन वेदनापूर्ण दगा देतः इ सपनोमे नहीं सोचने छलहीन ! निषा तुरत जुली सँ भेटिक अपन ब्यथा कय ब्याख्या आ विकाशक चरित्रक उज्जागर कदैय वेचारी जुली इ दुखद घटना सुनिक मर्माहित भोजईय !
                      विकाशक अध्यन संपन होईतेह किछ मासक अन्तरालमे विकाश पुलिस इंस्पेक्टर कय पद पैर बहाल भोजाईतअछ ! श्रीराम शर्मा जी फेर विकाश कय कहैय अहाँ पैढ़ लिख आला आफिसर भोगेलहूँ आब तेह विआह कलिय ने हमरा बृद्ध शरीरक कुन ठिकान आई छि कालही नहीं रहब !मुदा विकाश फेर बात टालमटोल कर लगैय नै बाबूजी हमर अखन उम्रे की भेल कने दिन आउर थाम्ही जाऊ श्रीराम शर्मा कहैछथि थिक छै जेना बुझाईछौह तहिना कर ! विकाश पूर्णरूप सँ भोग आर विलाश कय अधिनस्त भोगेल छैक ओ विआह बन्हन सँ मुक्त रह चाहैतअछ ओकरा  डर  छै जे विआह केलाक बाद हमर इ आजादी नहीं रही ज्यात ! विकाश अहि समयमे काठमांडू जिल्ला प्रहरी कार्यालय में बहाल छथि काठमांडूक रंगीन रमझम सँ मोहित भ क बियर बार,डांस केबिन रेस्टुरेंट   जाईलागैय  आ ओकर  खर्चा उठाबैलेल भ्रष्टाचारी सेहो कर लगैय भ्रष्टाचारी सँ अकूत पैसा कमाईतअछ विकाश कय बहुत बार बाला सभ सँ अनैतिक शारीरिक सम्बन्ध सेहो भोजैतअछ विकाशक दिनचर्या अहि प्रकारक बीतिरहल ऐछ एक दिन विकाश अस्वस्थ भोजईय आ बिरेन्द्र प्रहरी अस्पताल में हुनक इलाज होमैलागइए !मेडिकल जाँच सँ पता चलैएय जे विकास दू दू टा रोग सँ ग्रस्त छैथ डॉ.क रिपोर्ट अनुसार १.विकाशक लेफ्ट साइड किडनी फेल अछ २.एच.आई.भी.एड्स सँ ग्रसित सेहो ऐछ विकाश इ सुनिक हतप्रभ भोजैय !विकाशक स्वस्थ्मे कुनु सुधर नहीं भेलासं ओकरा एच.आई.भी.एड्स रोगी सुधार संस्थामें भरना कदेल्जैएय आर प्रहरी प्रधान कार्यालय द्द्वारा विकाशक चरित्रहीनता आ भ्रष्टाचारीक पुख्ता प्रमाण भेट्लक बाद नोकरी सँ बरखास्त कदेल्जैएय आ विकाश किछेक दिनमे विराट क्षितिज में विलीन भोजईतअछ !विकाशक असामयिक निधन कय कारन एकाहिटा छल जे ओ भोग कय भग नहीं जनलाह अपितु  भोगमे स्वयं भुक्त भोगेलाह !
लेखक: प्रभात राय भट्ट

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