गजल - अजय ठाकुर (मोहन जी) - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 24 नवंबर 2011

गजल - अजय ठाकुर (मोहन जी)

प्यार करे के सजा बहुत नीक दैतअछि कनियाँ /
मैर जाउ त जिबै के दुआ दैत अछि दुनियां //

"मोहन जी" कोन सूरज छथि जे इलज़ाम नै सहतैथ /
मिथिला में पत्थर के भगवान बना दैत अछि दुनिया //

इ जख्म प्यार के देखब नै ककरो /
आनि क पूरा बाजार सजा दैत अछि दुनिया //

किस्मित पर नाज़ नै करू मिथिला वाशी /
हाथ के लकीर मिटा दैत अछि दुनिया //

शादी के बाद मारे के उपाय करे अछि कनियाँ /
जिबे के उपाय सिखा दैत अछि दुनिया //