आब नै सताबू पिया परदेसीया@प्रभात राय भट्ट - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 12 अक्तूबर 2011

आब नै सताबू पिया परदेसीया@प्रभात राय भट्ट




गा आबू ने पिया परदेसीया
मोनक बतिया लिखैछी पतिया
प्यास मिलनके बड़ा रे सताबे
रही रही अहांक इयाद आबे     
विरहिन बनल हम जिबैतछी कलेशमें
एसगर कोना अहां रहैतछी पिया परदेशमे // १

गाम आबू ने सजना हमर सिनेहिया
एसगर छोइड गेलौं किये निरमोहिया
हमर हिया फटेय अहां लय पिया
अहां बिनु लागे ने कखनो हमर जिया
सेज पैर सुतैत हमर आंगी फटेय
अन्न पईन किछु निक ने लगैय // २

सास बुझैय हमरा बाझिन
नन्दी कहैय हाकिन डाकिन
जिनगी भेल अछि हमर  पहार सजना
लागे अहां बिनु सैद्खन अन्हार सजना
अहिं कहू यौ सजना कोना  खिल्तैय अंगना  
अहां बिनु कोना किल्क्तैय अंगनामें ललना  // ३

किलका खेलाबैय हमर संगी सखिया
हम गोदमे किलका खेलेबैय कहिया
गाम अबियौ मनसा पुर्बियौ पिया
हमर हिया फटेय मों काटे अहुरिया
गाम आबिजाऊ भेटैत हमर पतिया
आब नै सताबू पिया परदेसीया        // ४
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट