1


जीबन मे दर्दक सनेश शेष कुशल अछि
हम नहि कहब विशेष शेष कुशल अछि

अन्हरे सरकार तँ चला रहल राज-काज
की कहू, छै बौकक इ देश शेष कुशल अछि

देहे टा बदलैए आत्मा नहि सूनि लिअ अहाँ
एहने सरकारक भेष शेष कुशल अछि

मुक्का आ थापड़क उपयोग के करत आब
खाली आँखिए लाल-टरेस शेष कुशल अछि

गजल कहब एतेक सोंझ नै अनचिन्हार
हम तँ आब चलै छी बेस शेष कुशल अछि

**** वर्ण---------17*******

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035