1
अहाँ बूझि लै छी जुआरी अनेरे
जिबै कोन बैबे नियारी अनेरे

हहारो उठेलौं नचारी गबेलौं
सिहाबै किए छी मदारी अनेरे

जतेको नबारी छबारी बुरैए
घुरेबै कियो नै सुतारी अनेरे

घरोमे उपासे बहारो निरासे
दहारे अकाले हियासी अनेरे

चलै छी खटोली उठा ऐ भरोसे
भसाठी अबैए डरै छी अनेरे

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

  1. सूचना: बहरे मुतकारिब मुतकारिब आठ–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – चारि बेर
    मात्रिक गणना:तेरह टा स्वर वर्णमे अ,इ,उ,ऋ,लृ - ह्र्स्व आर आ,ई,ऊ,ऋ,ए.ऐ,ओ,औ- दीर्घ स्वर अछि।

    ई स्वर वर्ण जखन व्यंजन वर्णक संग जुड़ि जाइत अछि तँ ओकरासँ ‘गुणिताक्षर’ बनैत अछि।

    क्+अ= क,

    क्+आ=का ।

    एक स्वर मात्रा आकि एक गुणिताक्षरकेँ एक ‘अक्षर’ कहल जाइत अछि। कोनो व्यंजन मात्रकेँ अक्षर नहि मानल जाइत अछि- जेना ‘अवाक्’ शब्दमे दू टा अक्षर अछि, अ, वा ।

    १. सभटा ह्रस्व स्वर आ ह्रस्व युक्त गुणिताक्षर ‘लघु’ मानल जाइत अछि। एकरा ऊपर U लिखि एकर संकेत देल जाइत अछि।

    २. सभटा दीर्घ स्वर आर दीर्घ स्वर युक्त गुणिताक्षर ‘गुरु’ मानल जाइत अछि, आ एकर संकेत अछि, ऊपरमे एकटा छोट -।

    ३. अनुस्वार किंवा विसर्गयुक्त सभ अक्षर गुरू मानल जाइत अछि।

    ४. कोनो अक्षरक बाद संयुक्ताक्षर किंवा व्यंजन मात्र रहलासँ ओहि अक्षरकेँ गुरु मानल जाइत अछि। जेना- अच्, सत्य। एहिमे अ आ स दुनू गुरु अछि।

    जेना कहल गेल अछि जे अनुस्वार आ विसर्गयुक्त भेलासँ दीर्घ होएत तहिना आब कहल जा रहल अछि जे चन्द्रबिन्दु आ ह्रस्वक मेल ह्रस्व होएत।
    माने चन्द्रबिन्दु+ह्रस्व स्वर= एक मात्रा

    संयुक्ताक्षर: एतए मात्रा गानल जाएत एहि तरहेँ:-
    क्ति= क् + त् + इ = ०+०+१= १
    क्ती= क् + त् + ई = ०+०+२= २
    क्ष= क् + ष= ०+१
    त्र= त् + र= ०+१
    ज्ञ= ज् + ञ= ०+१
    श्र= श् + र= ०+१
    स्र= स् +र= ०+१
    शृ =श् +ऋ= ०+१
    त्व= त् +व= ०+१
    त्त्व= त् + त् + व= ० + ० + १
    ह्रस्व + ऽ = १ + ०
    अ वा दीर्घक बाद बिकारीक प्रयोग नहि होइत अछि जेना दिअऽ आऽ ओऽ (दोषपूर्ण प्रयोग)। हँ व्यंजन+अ गुणिताक्षरक बाद बिकारी दऽ सकै छी।
    ह्रस्व + चन्द्रबिन्दु= १+०
    दीर्घ+ चन्द्रबिन्दु= २+०
    जेना हँसल= १+१+१
    साँस= २+१
    बिकारी आ चन्द्रबिन्दुक गणना शून्य होएत।
    जा कऽ = २+१
    क् =०
    क= क् +अ= ०+१
    किएक तँ क केँ क् पढ़बाक प्रवृत्ति मैथिलीमे आबि गेल तेँ बिकारी देबाक आवश्यकता पड़ल, दीर्घ स्वरमे एहन आवश्यकता नहि अछि।

    U- ह्रस्वक चेन्ह
    ।- दीर्घक चेन्ह

    उत्तर देंहटाएं

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035