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हमर ठोर पर बस अहिंक नाम
चारू पहर बस अहिंक नाम


लोक मरैए अहाँक रूप देखि
सुन्दरताक जहर बस अहिंक नाम


किछु नहि बचल हमरा लग
तएँ सगरो उमर बस अहिंक नाम

नीक लगैए इ दुखक गाम हमरा
सुखक नगर बस अहिंक नाम


मोनक उत्फाल करेजक बिहाड़ि
आँखिक भमर बस अहिंक नाम

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  1. मोहन चौधरी9 फ़रवरी 2011 को 6:12 pm

    पुरना घामे नवका टीस द' देलहुँ।

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  2. वाह ... बहुत सुन्दर कविता मन को भावुक कर दिया आभार / शुभ कामनाएं

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