बड़द करैए दाउन ने यौ - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 10 जनवरी 2011

बड़द करैए दाउन ने यौ

 
बड़द करैए दाउन ने यौ
हाथी अगत्त, पिछू, थाइत, माइल बिरि
हिर्र-हिर्र सुग्गर चलू संग घर घुरि
ती-ती परबा उड़ि गेल ऊपर
लिह लिह बकरी घास तूँ खो
बड़द करैए दाउन ने यौ
 
अतू कुकुड़ कुत-कुत डॉगी
कैटी पिसू-पिसू आएत की?
चेहै-चेहै सुनि पारा दौगल,
भागी छोड़ि बाट हम ताकी
अर्र बकरी घास तूँ खो
बड़द करैए दाउन ने यौ
 
 
ढेहै-ढेहै कऽ नहि खौंझाबू
साँढ़ आओत खरिहानमे यौ
आव ठामे रे हे, हौरे हौ
बड़द करैए दाउन ने यौ