गजल - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 7 अप्रैल 2010

गजल


आरे तिरपित पारे तिरपित
कनही कूकूर माँड़े तिरपित

बैसि रहल सरकार चुना
देशक जनता ठाढ़े तिरपित

मना रहल मधुमास धनिकबा
गरीबक भाग अखाढ़े तिरपित

उठौना लागल दूनू साँझ
बाछी मुदा लथारे तिरपित

कतबो झपबै नंगटीनी के
निर्लज्जी मुदा उघारे तिरपित