सुन लक बुचबा टिक भेल ठार - मिथिला दैनिक

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रविवार, 4 अप्रैल 2010

सुन लक बुचबा टिक भेल ठार

एक टा नया गीत प्रस्तुत अछि। गीतकार छथिन हमर मित्र सहरसा-निवासी शैलेन्द्र कुमार ’शैली’, गीत के धुन आ स्वर- दुनु हुनके देल अछि।



सुन लक बुचबा टिक भेल ठार
कहलक बाबू आबै छि
भैया पढ़s दरभंगा मे
हम त गोबर थापै छि

हमी सब टा काज करै छि
खेती आ पथारी
हमरे बूते देखू बाबू
भरैया बखारी

भैया बुचकुन बाबू छैत
आ हम त बुरि कहाबै छि

सुन लक बुचबा....

भैया जखन गाम अबै छैथ
चाही खीर आ पुरी
हमरा खातिर देखियो सब दिन
वैह चिकना के गुरी

भैया पलंग पर सुतै छैथ
हम पटिया बिछाबै छि

सुन लक बुचबा...

भैया खातिर किन लैथ बाबू
बजाजक स्कूटर
हम खेत-खरिहान उगै छि
एक महिषक ऊपर


भैया खातिर बाटा जूता
हम त एंड़ धराबै छि

सुन लक बुचबा टिक भेल ठार....


- शैलेन्द्र कुमार ’शैली’
कायस्थ टोला
सहरसा-852201
संपर्क- 09430695337