4
गजल
पूरबे आ पश्चिमे सँ अएलै एहन फसादी रे जान
रे जान लगलै बड़का पसाही रे जान


ओ जे मोटेलै बलू कोना मोटेलै रे जान
रे जान खेने हेतै सभटा धन सरकारी रे जान


दोसर के काजो करैए उपर सँ लातो खाइए
एहने होइए बुड़िबक बड़ा बिहारी रे जान


पघिलैए जे लाहक जेना जमैए मोमक जेना
रे जान कहबै ओहए बड़ा सुतारी रे जान

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

  1. बड नीक रचना....तै पर गजेन्द्र जी के कमेंट सोना पे सुहागा

    उत्तर देंहटाएं
  2. भाइ राजरिशी जी परिस्थिति जन्य टिपण्णीक लेल धन्यवाद। मैथिली गजलक स्वरूप एखन स्थिर नहि भेलैक अछि।अरबी, फारसी उर्दू वा हिंदी गजलक नियम (बहर वा वजन ) पूर्ण रूपे मैथिली गजल पर लागू नहि भए सकैत छैक। चूँकि मैथिली आ उपरोक्त भाषा भिन्न छैक। सब सँ त पहिने बहरक गिनतीए मे अंतर छैक। उर्दू मे जतए मात्राक गनती बदत, सबब, आदि सँ कएल जाइत छैक ओतहि मैथिली मे संस्कृतक अनुसारे । उदाहरणक लेल (घर)क मात्रा उर्दू मे दीर्घ S होइत छैक मुदा मैथिली मे एकरा दूटा लघु । । हेतैक।
    आशा अछि जे इ अंतर अपने बुझैत हेबैक। ओना हमरा लोकनिक प्रयास अछि जे आगामी पाँच साल मे मैथिली गजलक स्वरूप स्थिर भए जाइक। आब अपने पर इ निर्भर अछि जे एहि काज मे अपनेक की आ कतेक सहयोग रहत। धन्यवाद।

    आशीष अनचिन्हार
    09968989527

    उत्तर देंहटाएं
  3. आशीष जी, अहाँ ग़ज़ल के प्रति गंभीर छी ई देख प्रसन्नता हौयत ऐछ...मुदा कुनु भी भाषा हो ग़ज़लक आधारभूत शिल्प त एके रहतै। हर शब्द के वजन ओकर उच्चारण पर निर्भर करै छै...अब जेना "घर" के हिंदी-छंद में ्सेहो वजन दू टा लघु लेल जाय छै मुदा जेना अहां कहलौं कि उर्दू में इ एक टा दीर्घ गिनल जाय छै...
    अहां एते सुंदर लिखै छी..कमाल के मिस्रा सब बुनै छिये। बस कनिकटा ध्यान देबै त कमाल क देबै। हम अपने एखन सीखिये रहल छी हिंदी में ग़ज़ल कहब...अहां के नंबर नोट क लेलौं ..फोन करब कखनु फुरसत में

    उत्तर देंहटाएं

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035