गीत-रमा कान्त झा (सौराठ ) बिहार - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 13 मार्च 2010

गीत-रमा कान्त झा (सौराठ ) बिहार

बसन्त आबि गेल नव कालिया सगरो गाछ छागेल !

पुरबा पछवा बसात बहैए , जवानीक ओ मद भरैए ,

दुख ने द्र्द्का ठिकः रहैए ,आम मंजरमे मधु लगैए ,

देस दुनियाकेँ हाथ चेला बनैए ,बाबाक भाषण सुनैए ,

कियो रमा देव , कियो कामा देव , सब डौगी चोला पहिरे ,

नारी संग नाच नाचैए ,कियो चिकोटी कियो नागी पेची .

आनंदक भोगी बनैए , मदिराकेँ अमृत बुझैए ,

झुठे भगवानक नाम जपैए , अपना आपके आफसर बुझैए ?

रमा कान्त झा (सौराठ ) बिहार