क्षणिका-प्रशांत मिश्र - मिथिला दैनिक

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रविवार, 20 सितंबर 2009

क्षणिका-प्रशांत मिश्र

हड़ाहि
एकटा हड़ाहि जे राति मे पटकलन्हि साँए के

तोड़लन्हि चौकी

भोरे-भोर पड़ोसनी के गरिअबैत कहलखिन्ह

हँ,चुप्प रह गे सत्तबरती

राँड़ी, छुच्छी, सँएखौकी