कविता- भूतःवर्तमानःभविष्य- आशीष अनचिन्हार - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

कविता- भूतःवर्तमानःभविष्य- आशीष अनचिन्हार

कविता
भूतःवर्तमानःभविष्य

अकबर के जोधाबाइक संग
विआह करबाक लेल परामर्श के देने रहैक
भूत बाजि ने रहल


रोमिला थापरक तर्क संपूर्ण रुपे सत्त
नागेश ओकक फूसि
लोक के गोधरे किएक देखाइत छैक
कश्मीरी पंडित आ राजौरी किएक नहि
वर्तमान नहि बाजि रहल


तुष्टीकरण के
कहिआ धरि भारत मे
धर्मनिरपेक्षता मानल जेतैक
भविष्य बाजि ने रहल