बाल कविता-२ गाछ मे -जीवकांत - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 21 मार्च 2009

बाल कविता-२ गाछ मे -जीवकांत

गाछ मे पात
पात मे बसात

पात मे फूल
गाछ झूल-झूल

पात मे छाह
गाछ वाह! वाह!

गाछ मे आम
गमकैए गाम

गाछ मे मेघ
भीजैए खेत

पातमे उछाह
गाछ वाह! वाह!