बाल कविता-१ जीवकान्तक दू टा कविता - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

बाल कविता-१ जीवकान्तक दू टा कविता

1.
अक्षर कवितामे अँकुसी- जीवकांत


नेना सभ लेल फूजल स्कूल
बड़का देबाल वला
बड़का बस वला स्कूल
अक्षर सभ
बनाओल जा रहल कटगर
पेंसिलक खपत बढल अछि
विद्यालयक देबाल होइत जाइत मोट
अक्षरक काट भेल सुरेब
शिक्षक भेलाह छोट

बहुत न्एना बकरी लए जाइए खेत दिस
देबाल दिस नहीं तकैए
फेकि देल खराँत वला सिलेट
अक्षर सभमे देखाइत चैक अँकुसी
विचित्र आकार
ओहिसँ नीक आकारमे
जन्म लैत अछि बकरीक बच्चा
शिक्षक सभकेँ अभिनन्दन
अभिनन्दन ह्रस्व इकारक मात्राकेँ
अभिनन्दन स्कूलक घड़ीकेँ
रजिस्टर सभक गेँटल अभारकेँ
नमस्कार


2.
तकैत अछि चिड़ै - जीवकांत



रातिक अंतिम पहरमे
चिड़ै जगैत अछि
राजमार्ग पर घोदिआइत अछि

छोट-छोट जानवर सभक देह
टुटैत अछि गाड़ीक पड़िया तर
छोट-छोट घौदामे
तकैत अछि चिड़ै

आंगनमे बाँस पर बैसल अछि छिड़ै
कुड़िअबैत अछि अपन पाँखि लोलसँ
तकैत अछि चिड़ै
चार सभक दुनू कात
झीलक कछेरमे सिम्मरक गाछ पर
बैसल चिड़ै गबैत अछि गीत
तकैत अछि पानि दिस
झीलक पानि दिस
की सभ दहाइत छैक पानिमे
तकैत अछि चिड़ै