गप नहि मानलहुं - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 24 दिसंबर 2008

गप नहि मानलहुं

अहां दोषी छी
अहां अपराधी छी
अहां चोर छी
अहां अभागल छी
अहां देशद्रोही छी
अहां स्वार्थी छी

ई गप हम नहि
काल कहि रहल अछि
ई गप हम नहि
इतिहास कहि रहल अछि
ई गप हम नहि
अहांक आत्मा कहि रहल अछि

अहां कहियो
आत्माक गप
नहि मानलहुं
समाजक फूइसगर
प्रतिष्ठाक पाछु भागैत रही
ताहि लेल छी दोषी

अहां कहियो
आत्माक गप
नहि मानलहुं
फूइसगर ठाठ-बाट लेल
घुइट-घुइट कए जिलहूँ जिनगी
ताहि लेल छी अपराधी

अहां कहियो
आत्माक गप
नहि मानलहुं
ख़ुद क नीक कहबाक लेल
अपन चैन चुराबैत छी
ताहि लेल ची चोर

अहां कहियो
आत्माक गप
नहि मानलहुं
ख़ुद कए भाग्यवादी देखबाक लेल
अभागल बनल रही
ताहि लेल छी अभागल
अहां कहियो
आत्माक गप
नहि मानलहुं
देश सेवाक जज्बा रहैत
देशकए लूटलहुं
ताहि लेल छी देशद्रोही

अहां कहियो
आत्माक गप
नहि मानलहुं
समाजक सेवा करैत-करैत
अपन सेवा करय लगलहुं
ताहि लेल छी स्वार्थी।