विवाहक—प्रतिक्षा - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू - मिथिला दैनिक

Breaking

सोमवार, 10 नवंबर 2008

विवाहक—प्रतिक्षा - सन्तोष मिश्र, काठमाण्डू

विवाहक—प्रतिक्षा

अमरकेँ माँ आ भाई अमरके विवाहक चर्चा करैत रहैत अछि । आ हाथमे फोटो लऽक केओ बजैय –"लैरकी त सिनेमाक हिरोनी सनकें छैक"फेर के ओ बजैय "लाखौ कि..... करोरोमे एक छै ।"ई वातक चर्चा करिते बेरमे अमर घरमे प्रवेश करैत अछि । केवारक आवाज सुनिकऽ अमरकेँ माँ केवारदिश तकैत अछि आ अमरके देखिक पुछैछथि "कि रौ आइ त...... सवेरे कलेज सँ चैलएलही ।"अमर जुत्ता खोलैत कनी स्तीरे सँ जवाब दैत अछि "हँ, आइ कलेजमे दुनु पाटीवाला छौरा सब झगरा झंझट कैलकै ताहीसँ......... कलेज अनिश्चित कालके लेल बन्द भगेलैक ।"ई सुनिक माँ बजैछठि "ई छौरा सब कौलेज पढ.ऽ जाइतछै कि राजनितीकरऽ ...किछ बुझ्वे नहि करैछी ।"अमर फेर कहैय "तो सब कथीके चर्चा करैत छलेह ?"प्रश्न सुनिते अमरके भाई सुवोध बजैय "भैया .......ई फोटो देखीयौ ने ।"अमर भाइकेँ हाथस फोटो लऽकऽ देख लगैछैक ।फेर ओ फोटो उल्टवै छैक । फोटोक पाछामे लिखल पत्ता अमर पढिकऽ ओ फोटो द दै छैक ।दोसर दिन अमर भोजन कऽकऽ तैयार होइछै आ अपनमाँ के कहैछै–"माँ, हम कने मधुबनी जाइतछि ।"माँ ई सुनिक जवाब दैत छथि "परसु तोरा ओमहर सँ देखऽ अबैत छौ आ तो......""नहि माँ हम कल्हिए चैल अवौ ।"माँ कहैत छथि "ठिक छै जो ........मुदा वातमे फरक नहि परबाक चाही ।"अमर अपनसाथी रंजीतके साथमे लऽकऽ फोटोपर लिखल वाला पतापर चैलजाइए । गाँउमे जखन ओ सब पहुचैय तँऽ ओत देखैय कि लोक सब केओ केमहरो, कओकेमहरो भगैत रहैछ । अमर आ रंजीत दनूु ओमहरे जाइए जेमहर आगि लागल रहैत छैक ।ओहीठाँम एकटा विधवा, दुटा महिला आ एकटा स्यान लैरकी खुब कनैत रहैतछैक । ओकरा सबहक मुहसँऽ "बौआ रौ बौआ" निकलैत रहैक छै । ई देखिक रंजीत बुदिया सँऽ पुछैत अछि "कि भेलैय जे वौआ, वौआ कहैछि ।"बुदिया कनैत जवाव दैय "वौआ...... रे हमर पोता ओहिमे.....।"ई सुनिते अमर पहिनही दौरजाइत अछि । आ पाछा सँ रंजीत हल्ला करैय "रुक !!! रुकिजो अमर........ ।"अमर आगि आगल घरमे पैस जाइय । रंजीत पाछु सँ दौरैत अछि मुदा पैसऽ सँऽ पहिनही केवार खसिपरैछैक । करिब तिन–चारि मिनटककेँ वाद अमर वच्चाकेँ लऽकऽ खिरकी दने कुदैत छैक । ई देखक रंजीत कने नमहर श्वाश लैय । जखन पुरा आगि मिझा जातिछै त अमर आ रंजीत अपन घरकेँ लेल चैलदैय मुदा बुदिया वड आग्रह करऽलगैछै "बौआ आई एतै रैहजाउ ।"वुदियाके आग्रह देखकऽ रंजीत अमरकेँ रुकिए जाएला कहैछै । केओ गोटा अमर आ रंजीत सँ परिचय सेहो नहि पुछै छैक । किया त ई सब अमर परिचय वच्चाकेँ जान बचाक दऽदेनेरहैछैक । घर जरिगेलाक वादो वुदिया अमर पाहुनके दलानपर वैसबैय आ वुढि. ओतऽ सँ चलिजाइए ।पोखरिदिश जाएके बहाना बनाकऽ दुनुसाथी घुमऽ केँ लेल निकलैय किया त हुनका सबके एकटा दोसर काज सेहो छैन । ओमहरसँऽ एकटा मर्द हाथमे लोटा लेने अबैत रहै छथि । हुनका बजाकऽ रंज्ीत पुछैय—"भाईजी व्रज मोहनजीक घर केमहर छैक ।"ओ वटोही जवाब दैय "ओ हुनकरे घरमे त आइ .........आगि लागीगेल छलैय ।"अमर विचार करऽ लगैय ओ लैरकी कें बारेमे किया कि ओहे लैरकी सँ बिबाहक बात रहैछै । दुनुसाथी चिन्तामे पैरजाइए । आ चुपचाप अपन दलान पर आबिक बैसजाइए । के ओ किनको सँ वजितो नहि रहैछैक । कनिके देरके वाद ओ लैरकी खाना लकऽ अबैय । भोजनक साज देखक रंजीत कहैय "एतेक करऽकेँ कोनो जरुरीए नहि छलैक ।"मुदा ओ लैरकी कोनो प्रकारक जबाब नहि दैत कहैछैक "आहाँसबकेँ भुख लागिगेल होयत जल्दिसँऽ .....भोजन कलिअ ।"दुनु गोटा भोजन कएलाकवाद रंजित अमरकेँ लैडकी केँ आगातक अरीयाति देवऽ ला कहैतछै । अमर वै लैरकीके अरीयातऽ चैलजाइए । रंजीत तऽ मोनेमोन खुसी रहैय कि अमर ओकरा सँऽ किछ नहि किछ त पछबे करतै । मुदा अमरकेँ ओकारासँ किछ पुछवाक लेल हिम्मत काजेनहि करेछैक । किछ आगु अएलाक वाद ओ लरकी कहैछैक –"आँहा जाउ, आरम करु ।"अमर दलानपर फिर्ता भऽ जाइए ।प्रातःकाल सूर्योदय होबऽ सँऽ पहिनही रंजीत आ अमर ओतऽ सँऽ चैलजाइय । अमर घर पहुंचकऽ माँ आ बाबुजीकें दहेजक बिक्रीतीके बारेमे चर्चा सुनबैय । मुदा अमरके बाबुजी ई सब सुनलाक वाद जवाब दैछथि–"रे तो सब नहिने वुझबे जे कतेक आशा राखिक तोरा सबमे खर्च कैलि आ अखनो करैछी ।" पोर साल जे तोरा वहीनक बिबाहमे तिन लाख तिलक गनलहुँ से । ओइ समयमे दहेगकऽ विक्रिती त केओ नहि सुनैलनि ।"ई सुनिक" अमर वावुजीक विचारकेँ वारेमे नहि सोचैछ कि मुदा ओ लैरकि वाला सवकेँ वारेमे सोचऽ लगैछय जे ओ सब पहिने घर पर ध्यान देता कि तिलक गन्ता । ई वात सोचिते अमरकेँ बाबुजी सऽ सहमति नहि भऽ ओही साझँ घर सँ कतौ भागिजाइय ।लैरकी देखाबऽ के लेल जानकी मन्दिरमे अबैय । अमर नइ होबऽके कारणसँऽ अमरके माँ अमरके फोटो लऽकऽ पहुचैय । जलपान आदी भेलाकवाद आब सबगेटा लैरका के बजाबके लेल कहैय । ई सुनिकऽ अमरकेँ माँ कहैछथि "अमर त कने कौलेजके काजसँऽ काठमाण्डौ गेलअछि ।"फेर अमरके फोटो वेगमेसँ निकालिकऽ दैत कहैछथी "हे, लिअ ...........फोटो लैरकाकेँ ।"लैरकि वाला सव फोटो देखिते एकआपसमे कानफुस्की करऽ लगैय । सवगोटा फोटो देखिते–देखित फोटो लैरकीके हातमे परैय । फोटो देखिते ओ चिन्हलैय । अमर के प्रतिक्षा करऽ केँ क्रममे विवाहक वात कतेकवेर पक्का भभऽ कऽ टुटिजाइछनि । एक–डेढ वर्ष तक अमरके वाट तकिकऽ लैरकिक बाबुजी विवाहकऽ वात दोसर ठाम करैछथि मुदा ओ लैरकी अपन बाबुजीकेँ कहैय "बाबुजी, जौ हम विवाह करब त..................अमर सँ नहि त अहिना रहब । बल्कि हम अमरके प्रतिक्षा करब मञ्जुर अछि ।"अपन संतान त केकरो भारी नहि होइछैक । बाबुजी किछ जवाव नहि देलाह । आ ओ अमरसँऽ विवाह करव कैहक प्रतिक्षा करऽ लगली । बिश वर्ष त बितगेलै मुदा बिभा अखनो अमरके संग होबऽबाला बिबाहक प्रतिक्षा करैय ।