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होली उत्सव के उत्पति के कथा हिरण्यकश्यप के बहिन होलिका आर पुत्र प्रह्लाद सs जुरल अछि !!



इ पर्व के मुख्य संबंध बालक प्रह्लाद सs छैन ! जे रहैत तय विष्णु भक्त मुदा एहेंन परिवार मए जन्म लेलेथ रहा जकर मुखिया क्रूर आर निर्दयी रहथिन ! प्रह्लाद के बाबूजी अर्थात निर्दयी हिरण्यकश्यप अपनाआप कए भगवान सम्झैत रहथिन ! आर सब प्रजा सए इये उम्मीद करैत रहथिन की ओहो सब हुनका भगवान मानैत पुजैन ! जे हुनका नै पुजैत रहथिन ओकरा या तए माइर देल जैट रहेँन या कैद खाना मए बंद कैल जायत रहेँन ! जखन हिरण्यकश्यप कs पता चललैन की हुनकर पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त छैथ तs पहिने हुनका (प्रह्लाद) कए डरे - धमके कए आर अनेक प्रकार सs हुनका पर दबाब डाइल कए की ओ विष्णु भगवान कs छोइर हुनका (हिरण्यकश्यप) कs पुजैथ समझाबे के प्रयाश केलखिन ! मगर प्रह्लाद कए अपन भगवान विष्णु पर अटूट श्रद्धा रहेँन ओ बिना कुनू भय के हुनका पुजैत रहलाखिन ! सब प्रयाश के बावजूद जखन प्रह्लाद नै मानलखींन तए हिरण्यकश्यप बिचार्लैथ की प्रह्लाद कs जान सए मैर देल जाई ! एकरालेल ओ बहुत तरह के उपाय केलैथ मुदा हर बेर असफल रहलैथ ! अंत मए हिरण्यकश्यप अपन बहिन होलिका, जिनका अग्नि मs नै जले के वरदान प्राप्त रहैंन, हुनका बजेलखिन आर प्रह्लाद कए मारै के योजना बनेलखिन ! एक दिन निर्दै हिरण्यकश्यप बहुत सारा लकड़ी जमा केलेथ आर ओई मए आइग लगे देलखिन ! जखन लकड़ी तीव्रता सs जरे लग्लैन तए हिरण्यकश्यप अपन बहिन होलिका कए आदेश देलखिन की ओ प्रह्लाद कs गोद मए ले कs जडैत आइग मए बैसेथ ! होलिका हुनकर आज्ञा के पालन करैत ओहिना केलखिन ! दैवयोग सs प्रह्लाद बैच गेला आर होलिका वरदान के बावजूद ओही आइग मए जैल कs भस्म भे गेली ! तहिये सs प्रह्लाद के भक्ति आर असुरी राक्षसी होलिका के स्मृति मए इ त्योहार मनेल जैत अछि !



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  1. एक बेर फेर बहुत नीक प्रस्तुति।

    ঠাকুব

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  2. ee blog samanya aa gambhir dunu tarahak pathakak lel achhi, maithilik bahut paigh seva ahan lokani kay rahal chhi, takar jatek charchaa hoy se kam achhi.

    dr palan jha

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