गजल-जगदानंद झा 'मनु'

हाथी दाँत खे के आर, देखाबै कए छै आर
नेता कें कहैक तँ बात आर करै कए छै आर

केलक भोज जे नै दालि बड सुडके, इ जग-जाहीर
भोजक बात आरो छैक, बात किनै कए छै आर

दोसर कें फटल में टाँग, सब कीयो अडाबै छैक
फाटल अपन सार्बजनिक देखाबै कए छै आर

सासुर कें मजा बहुते होइ छै, अपने बुझल सब नीक
कनियाँ सन्ग सासुर में मजा तँ रहै कए छै आर

भाई धन कए गौरब तँ गौरबए बताहे छैक
आ सम्पैत-गौरब बाप जँ कमेलै कए छै आर

(दीर्घ,दीर्घ,दीर्घ,हस्व SSSI, चारि-चारि बेर सभ पांति में )

***जगदानन्द झा 'मनु'

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