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दरभंगा। 25 मई। बाबा नागार्जुन ग्राम सेवा समिति एवं बी.वी. शांति फाउंडेशन गुजरात केर संयुक्त तत्वधानमे बाबा यात्री जीक गाम तरौनीमे 'तरौनी-महोत्सव' मनाओल जा रहल अछि। कार्यक्रम अध्यक्ष श्री संतोष मिश्रा एवं सचिव श्री विश्वम्भर झा संगहि संगठन महामंत्री श्री प्रकाश झाक कुशल नेतृत्वमे तैयारी अंतिम दौरमे चलि रहल अछि। कार्यक्रमस्थल छोटकी तरौनी (विश्वनाथपुर तरौनी) केर विश्वनाथ महादेव मंदिर एवं प्रस्तावित बाबा नागार्जुन प्रखण्ड मैदानक प्रांगणमे होयत। इ महोत्सव तरौनीक गौरवमयी अतीत जाहिमे एकसँ बढिकय एक विभूति, साहित्यकार, कवि, व्याकरणाचार्य आदि भेलाह हुनक कृतिसँ नव पीढिकेँ परिचय संगहि प्रवासी तरौनीक एवं गामहि में रहनिहार लोकसँ एकदोसराक परिचय करेबाक छोटछीन प्रयाश अछि इ अध्यक्ष श्री संतोष मिश्राजी जनौलनि। प्रस्तावित प्रखंड परिचर्चाक माध्यमसँ सेहो एकर माँग में स्थानीय पंचायतक लोक एकजूट भए अभियान केर आवाजकेँ बुलंद करताह। तत्पश्चात प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार लोकनीक द्वारा कविता पाठ होयत संगहि विशिष्ट पाहुन एवं मिथिला-मैथिली लेल कार्यरत संस्थाकेँ सम्मानित सेहो करबाक योजना अछि। कार्यक्रम केर अंतिम चरणमे सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन होयत जाहिमे मिथिलारत्न गायक श्री कुंजबिहारी मिश्रा जी एवं हुनक टीम संगहि प्रख्यात मैथिली रॉक स्टार सह अभिनेता माधव राय, बबली चौधरी जी द्वारा अपन आवाजक प्रस्तुतिसँ उपस्थित श्रोताकेँ मनोरंजन करताह। मँच संचालन केर दायित्व प्रसिद्ध हास्य उद्घोषक राधे भाई केर जिम्मा छन्हि जे अपन एकसँ बढिकय एक मैथिलीक विलुप्त होएत बोल, फकरा, चुटकुलासँ कार्यक्रममे चारि चान लगौताह।

तरौनीक अतीत संगहि परिचय :
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तरौनी गाम दरिभंगा जिलान्तर्गत बेनीपुर प्रखंडक एकटा प्रतिष्ठित गाम थिक जकर पांडित्य, न्याय, दर्शन, व्याकरण, साहित्य ज्ञानसँ मिथिले नहि अपितु सम्पूर्ण भारतवर्ष एतुका ज्ञान पुंजसँ दिव्यमान होएत रहल अछि। इ प्राचीन कालहिं सँ विद्याक सिद्धपीठ रहल अछि। एतै जहिना सिद्ध महात्माक परंपरा रहल अछि तहिना महान पण्डितक सेहो। एकरहि समीप एक माइल पूब (नेहरासँ उत्तर) महाराज हरिसिंह देवक रजवाड़ा (राजद्वार) छल। नेहरा गामक पश्चिम हुनकर चौरासी बीघाक पोखरि एखनहु विद्यमान अछि जकर पछवड़िया भीर पर ओ राजा विश्वचक्र (100 भरि सोनाक बनल) यज्ञ कय ओकर दान कयने छलाह आ पंजी प्रबंधक लेल ब्राह्मण सभा कयने छलाह। एहि सब कृत्यमे तरौनीक पण्डितक सहभागिता स्वभाविके थिक। एहि गामक हस्तलेखकेँ आधार पर नागेन्द्रनाथ गुप्त विद्यापति पदावलीक संपादन कयलनि तैं विद्यापतीक एहि पदावलीक नामे पड़ि गेल तरौनी पदावली। जे पछाति विद्यापति पदावलीमे एहि नामसँ कहल गेल अछि। एहि गाममे विद्यापतिक हाथक लिखल श्रीमद्भागवत(ताल पत्र) उपलब्ध भेल छल। महामहो पंडित परमेश्वर झा मिथिलातत्व विमर्शमे लिखैत छथि महाराज शिवसिंहक रजवाड़ासँ अव्यवहित पश्चिम तरौनी गाम अछि ओहिसमय एहि गाममे बड्ड भारी विद्वान, सिद्ध पुरुष तथा श्रौतस्मतीनिपुण लोक बसैत छलाह जे शिवसिंहक आश्रित भए अनेकों ग्रामोपार्जन कयलनि। विशेषतः कर्म हे मूलक क्षत्रिय ब्राह्मण छलाह। हिनका लोकनीक डीह गामक दक्षिण-पश्चिममे छन्हि आ संप्रति ओहि डीहकेँ लोक सभ विष्णुपुरी डीह कहैत अछि।
एखनहु आधुनिक शिक्षा, व्यवस्था, यथा-अभियंत्रण, चिकित्सा, व्यापार आदि क्षेत्रोंमे भारतवर्षक प्रसिद्ध प्रतिष्ठित संस्थान सभमे नामांकन वा कि परिक्षोतीर्ण भए सर्वोच्च पद सभपर आसीन छथि।

तरौनी नाम कियैक पड़ल..???
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तरौनी गामक नाम तरौनी कियैक पड़ल तकर कुनो प्रामाणिक इतिहास एखन धरि जनतब नहि भेल अछि। ओना लोकश्रुति केर आधार मानैत ई लिखब सर्वथा उचित होयत जे तरौनी नाम मूल रूपसँ संस्कृतक शब्द तरुवनी केर अपभ्रंश थिक जकर शाब्दिक अर्थ भेल (तरु + वनी) नमहर-नमहर गाछक बोन। तरौनीक सम्बन्धमे ई जनश्रुति सार्थक बुझना जाएत अछि कारण एकसँ बढिकय एक संत-महात्माक ई तपोभूमि रहल अछि जे अपन तप-साधनाक बले सिद्धि प्राप्त कयने छथि। प्रामाणिक दृष्टिकोणसँ तरौनीक इतिहास पन्द्रहम शताब्दीक आरंभमे भेटैत अछि। जाहि भूमि पर श्री विष्णुपुरी झा केर जन्म 1425 ई. में भेल छल। तरौनीक इतिहास अविस्मरणीय अछि आ एकर इतिहास बड्ड शोधक विषय थिक एवं अद्यतन एहि गामक इतिहास पर शोध नहि भेल अछि जकर परम आवश्यकता अछि। तरौनीमे 600 सँ बेसिये कवि, विभूति, साहित्यकार, व्याकरणाचार्य एवं न्यायाचार्य भेलाह अछि। उपरोक्त जे किछु विभिन्न पुस्तक, अध्ययन, लोकश्रुति द्वारा भेटल तकरा सद्य: ओहिना पसारि रहल छी।


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