हमरा मिथिला राज्य ईs चाही (कविता) - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 23 जनवरी 2017

हमरा मिथिला राज्य ईs चाही (कविता)

सुन्दर सनक इ मिथिला नगरी, 
सभसँ ऊँच जनकक अछि पगरी, 
माँ जननी जानकी'क इ धाम, 
एकर कहु किया हएत अपमान! 
आब नहिं बोली-वचन चाही, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

बिस्फी अछि विद्यापति'क गाम, 
जतs उगना बनि एला भगवान, 
मण्डन, आयाची, मधुप'क गाम, 
तखन कोना नहिं हएत गुमान! 
मिठगर मैथिलि'क सम्मान चाही, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

सीतामढ़ी, दाय सीता'क गाम, 
जतs दुलहा बनि एला श्रीराम, 
टीक, तिलक हम्मर पहचान, 
हमर नामी अछि पान-मखान! 
आब नहि कोनो प्रलोभन चाही, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!!

गाबए जतs पराती भोरे, 
सोहर , लगनी सबहक ठोरे, 
जतs पूजय शालीग्राम भगवान, 
एहन मिथिला'क संस्कार महान! 
मरूआ रोटी, खेसारी चाही, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

कुर्ता, धोती, लाल अँगोछा, 
बीचे आँगन अहिपन चौका, 
चुड़ा, दही, चीनी, तिलकोर, अचार 
तेतैर, आमोट केर जतs सहचार! 
किया बिसरल यौ मैथिल भाई, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

सादा जीवन, उच्च विचार 
मिथिला'क अछि चिक्कन व्यवहार, 
ज्येष्ठ कs देखतहिं प्रणाम पाती, 
जरबए मइटक दीया बाती! 
पाग चादर सँ जतs बिदाई, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

मिथिला पेंटिंग जगत विख्यात, 
कला संस्कृति'क भरल अछि पात्र, 
'अतिथि देवो भवः'कs नारा, 
करिया नाग बनल बिषहारा! 
जतs दीवाली मs हुक्का डाही, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

अष्टम सूची देल मैथिलि भाषा, 
हमरा प्रगतिक बहुत पिपासा, 
सबहक अछि जौं मोनक आशा, 
मैथिलि बनत राष्ट्रीय भाषा! 
सब चोरबा अछि भ्रष्टाचारी, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

हयहट्ट, उच्चैठ, कुशेश्वर धाम, 
माँ श्यामा'क शत-शत प्रणाम, 
हुवए नहिं ईs संघर्ष विराम, 
जाधरि नहिं भेटत पहचान! 
आब दर्दक नहिं करब उगाही, 
हमरा मिथिला राज्य ईs चाही!! 

__नवल किशोर झा