"तेरहम् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे परिचर्चाक विषय छल "विमुद्रीकरणक प्रभाव" - मिथिला दैनिक

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शनिवार, 24 दिसंबर 2016

"तेरहम् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे परिचर्चाक विषय छल "विमुद्रीकरणक प्रभाव"


"तेरहम् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे परिचर्चाक विषय छल "विमुद्रीकरणक प्रभाव"
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बैद्यनाथधाम (देवघर), दिनांक २३ दिसम्बर, २०१६ ।

द्वितीय दिवस केर सम्मेलनमे एक परिचर्चाक आयोजन भेल, जाहिक विषय छल "विमुद्रीकरणक प्रभाव ।" एहि परिचर्चामे भाग लैत "मिथिला विकास परिषद, कोलकाता, केर अध्यक्ष अशोक झाजी अपन वक्तव्य सेहो रखलथि । केन्द्र सरकार द्वारा पैघ टाका बंदी संबंधित विषय पर  हुनक वक्तव्य एहि प्रकारें अछि ।

                  "विमुद्रीकरणक प्रभाव"
               

                          --अशोक झा, अध्यक्ष, मिथिला विकास परिषद, २४३, रविन्द्र सरणी, कोलकाता - ७०० ००७.

आई २३ दिसम्बर, २०१६ नव वर्षक आगमन भS रहल अछि । स्कूल मे छात्र सभ मस्त छथि आओर नोटक अभाव मे मम्पी-पापा, हीत-अपेक्षित पस्त छथि । जेबी मे नोटबंदीक कारणे सभ बेदम भेल छथि तथा बाजार मे दम नञि अछि जे कियो ककरौ उधार देत । "विमुद्रीकरण" गरीबी हटेबाक पुनरावृति अछि । जमि के एहि गप्पक संग करिया धन हटेबाक सेहो खुब प्रचार भS रहल अछि । भारतक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर मोदीजी द्वारा विमुद्रीकरणक एलान कयला चारि सप्ताह सँ बेशी समय भS गेल । ३० दिसम्बर, २०१६ के दिन विमुद्रीकरणक कारणें सभ कष्ट सँ ऊबारि देबाक लेल प्रधानमंत्री मोदीजी द्वारा माँगल गेल पचास दिन के समय-सीमा शेष भS जायत । नोटक विमुद्रीकरण भारत मे अनेकों कें हतप्रभ कS देलक । दिसम्बर महिना प्रतिबंधित ५०० आओर १००० टका जमा करबा मे बीति रहल अछि । जाहि गति सँ प्रतिबंधित नोट Bank मे वापस आबि रहल अछि ओहि सँ सरकार कें आश्चर्य भेनाई स्वाभाविक । नवम्बरक अंत धरि एहन नोटक दू-तिहाई हिस्सा बैंकमे जमा भS चुकल अछि । विमुद्रीकरणक नोट वापसीक गति अगर इएह रहल तS ५००-१००० टकाक नब्बे सँ पन्चानवें प्रतिशत नोट रिजर्व बैंक ऑफ इण्डियाक निर्धारित अंतिम तिथि ३० दिसम्बर, २०१६ धरि जमा भS जायत । पुरनका नोट अगर वापस आबि गेल तS जाहि काला धनक जोर सँ चर्च भS रहल अछि ओ काला धन कतS अछि ?

सरकार दावा कयने छल जे नोटक विमुद्रीकरणक प्राथमिकता अछि करिया धन के वापस आनब । विमुद्रीकरण सँ सरकारी लागत सँ  फायदा भेल ई मेल नञि खा रहल अछि । मोदीजी कें तबाह करSवला विमुद्रीकरण सँ जाहि परेशानीक जन्म भेल अछि ओहि गणित के आधार पर सात-आठ लाख करोड़ पैघ नोट बाहर नञि आबि सकल अछि, या जे बैंक मे जमा नञि भेल अछि । संभवतः एहि तरहक नोट राखSवला कालाधनक कानून (द्वितीय) संशोधन विधेयक २०१६ के प्रतीक्षा कS रहल छथि जे लोकसभामे पारित भS चुकल अछि । ई संशोधन अबैध धन सँ ऊबरबाक लेल नीक साधन अछि । एहि के माध्यम सँ पचास प्रतिशत कर चुकेबाक प्रावधान रहत, शून्य ब्याजक दर पर चारि साल धरि पच्चीस प्रतिशत धन जमा राखल जेतैन्ह आओर बचलाहा पच्चीस प्रतिशत जमाकर्ताक clean money क रूपमे जमाकर्ता बैंक सँ टका निकालि सकताह । ई योजना ३० दिसम्बर, २०१६ धरि खुजल रहत । वस्तुतः एहि कानूनी प्रक्रिया सँ कर-वंचक पछिला केबाड़ दने बैंक दिश हँसैत जा कS अपन करिया धन उज्जर कS लेताह । रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया के २-३ लाख करोड़ सँ बेशी टकाक देनदारी सँ मुक्ति पएबाक ई सहज अवसर छन्हि । सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया अगर डिविडेंटक रूप मे सरकार कें ई धन हस्तान्तरित करैत अछि तखन मोदीजी रोविनवुड जकां अपना कें हाजिर करबाक अवसर प्राप्त कS लेताह । एहि अप्रत्याशित लाभ सँ "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY)" के समृद्ध बना लेल जायत ।

करिया धन दूर करबाक या कर-वंचक केर खिलाफ कारवाई करबाक पछिला सभ प्रयास चाहे ओ मोरारीजी देसाई कार्यकालक हो वा वी. पी. सिंहजीक समय के हो, नाकाम रहल अछि । एहि मे गरीबी हटेबाक नाम पर बैंकक राष्ट्रीयकरण, कोयला खदानक संग बीमा-कम्पनी सभहक राष्ट्रीयकरण, इन्दिरा गाँधीक अपवाद प्रयास अछि ।  इन्दिरा गाँधीक प्रेरणा सँ मोदीजी अपन पूर्ववर्ती लोकनिक सोचक गहराई मे उतरिके वर्ग-कार्ड सेहो खेल रहल छथि । विमुद्रीकरणक नवअवतारी मोदीजी द्वारा लेल गेल एहि निर्णय के गरीब जनमानस सहनशीलताक संग एहि आशा सँ स्वीकार S रहल छथि जे थोड़ेक परेशानीक बाद हुनकर असमानता संभवतः दूर भS जेतन्हि । जाहि देश मे असमानता हो, जतS बेशी लोक गरीबी मे जीवनयापन करैत होथि, ओहि देश मे नरेन्द्र मोदीजी द्वारा अचानक विलक्षण ढ़ंग सँ मौद्रिक अभियान कतेक प्रभावशाली होयत एहि गप्पक फरिछाऊठ सहजहिं संभव नञि अछि । विमुद्रीकरण संभवतः महाघपला वा अपराध प्रमाणित तS नञि भS जायत ?

दुनियामे प्रतिष्ठित पत्रिका "Economist" अपन सबसँ ताजा अंकमे (०३ दिसम्बर, २०१६) विमुद्रीकरणक नीक उद्वेश्यसँ बर्बादी लाबयवला अधकचरा डेग लिखने अछि । "Economist" पत्रिका मे लिखल आलेख मे दुनियाके ओहि देशक नाम सेहो उल्लेख कयने अछि जाहि देशमे विमुद्रीकरणक कारणें बर्बादी भेल अछि । विमुद्रीकरणक डेग सँ आई धरि कोनो देशके लाभ नञि भेलैक अछि । इतिहासक भूल सँ बिनु किछु शिक्षा लयने नोटबंदी, विमुद्रीकरणक डेग, मोदीजी उठौलनि अछि ओहि सँ आई नञि काल्हि ई अवश्ये प्रमाणित भS जायत जे मोदीजी घपला कS देलनि । जाहि विमुद्रीकरणक कारणें हुनका द्वारा घोषित उद्वेश्यक पूर्ति संभवतः कहियो नञि होयत आओर अगर जँ उद्वेश्यक पूर्ति हेबो करत तS विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ देशके अनावश्यक नुकसान हेतैक ।  "Economist" मोदीजी सँ अफरातफरी बचाबSवला डेग के वापस लS लेबाक सेहो सुझाव देलक अछि ।

विमुद्रीकरण लगभग एक मासक यात्रा तय कS रहल अछि । बिनु सोचने-बुझने डेग उठेबाक प्रतिफल अछि जे सामान्य लोक सभ काज छोड़ि बैंकक सामने ठाढ़ भS जाइत अछि आओर जखन हुनकर बारी अबैत छन्हि तखन बैंक अधिकारी फरमान जारी करैत कहैत छथिन जे एतबहिं टाका भेटत । आई विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ  मोदीजी जतेक खुश छथि ओहि सँ कम खुशीक माहौल पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयीजीक कार्यकालमे "साईनिंग इण्डिया" मे नञि छल । ओहि "साईनिंग इण्डियाक" परिणाम सभहक सामने अछि । भारतके भारते जकां  सजेबै तखने भारतक करिया धन पर अंकुश लागत । चुनाक पूर्व करिया धनक मुद्दा जोर-शोर सँ उठल छल । कहल गेल छल स्वीस बैंक सँ करिया धन आनल जायत। मुदा करिया धनक वापसीक गप्प बिसरा देल गेल आओर विमुद्रीकरणक नारा सँ लोकमे एक नव आशा, उन्मादक खेती प्रारम्भ भेल जाहिके प्रभाव सँ आई भलेहि हम सभ प्रभावित हेबाक गप्प नञि सोचि, मुदा निःसन्देह भविष्यमे एहि सँ प्रभावित मध्यमवर्गीय लोके हेताह । विमुद्रीकरणक डेगके लगभग एक माहक बाद रिजर्व बैंकक गवर्नर विमुद्रीकरणक डेगके समुचित बतौलनि अछि मुदा एहिके प्रभाव सँ अपन मौद्रिक नीतिके दूरहिं राखब उचित बुझलनि अछि ।

नोटबंदीक पश्चात ७ दिसम्बर, २०१६ धरि ५०० एवं १००० के पुरनका नोट बैंकमे साढ़े ग्यारह करोड़ जमा भS चुकल अछि । मुदा आर. बी. आई. द्वारा रेपो रेट आओर रिवर्स रेपो रेटमे कोनो तरहक परिवर्तन करबाक निर्णय नञि लेल गेल अछि । एहि सँ ई साफ परिलक्षित होइत अछि जे विमुद्रीकरणक पश्चात जे टाका बैंक मे जमा भS रहल अछि ओ एक नितांत सामयिक मामला अछि । करेंसीक आपूर्ति मे जहाँ सहुलियत हेतैक की एहि तरहक जमा राशि कपूर जकां बैंक सँ ऊड़ि जेतैक । इएह कारण अछि जे विमुद्रीकरणक कारणें जे राशि बैंक मे जमा भेल अछि आर.बी.आई. ओहि के आधार मानि कS अपना नीति मे कोनो प्रकारक दीर्घकालीन प्रभावक परिवर्तन करबाक पक्ष मे नञि अछि । विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ बैंके जखन प्रभावित नञि भS रहल अछि तS आम लोकक गप्पे कोन ? विमुद्रीकरणक सभ सँ बेशी प्रभाव आओर धक्का विकासक गति पर लागत जाहि कारणें जी डी पी के वृद्धि दर मे ०.५ प्रतिशतक गिरावट अवश्यम्भावी अछि । एहि सँ मुद्रा स्फीर्ति पर की प्रभाव पड़तैक, ताहि दिश आर. बी. आई. द्वारा आकलन नञि करब, मोदीजी द्वारा उठायल गेल विमुद्रीकरणक क्रान्तिकारी डेग पर एक जोरदार थापर अछि । अन्ततोगत्वा विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ भारतक सामान्य लोकक जीवन मे विकासशील अर्थव्यवस्था मे अंतरघात एवं तबाही आनSवला डेगक दुष्प्रभाव सँ कियो नञि बाँचि सकत, बैंको नञि ।

विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ सबसँ बेशी आओर सिर्फ पी टी एम आदि तरहक गैर-बैंकिंग निजी-वित्तीय कम्पनी सभ लाभान्वित होयत । पी टी एम जेहन कम्पनीक हितक लेल विमुद्रीकरणक डेग के मोदीजी कैसलेस अभियान मे परिवर्तित करबाक ब्रेनलेस प्रचारक बनि गेल छथि । मोदीजी कैसलेस के एहि तरहें प्रचार कS रहल छथि जे नगदी-विहीनताक अर्थ शोषणविहीनता भS गेल हो । विमुद्रीकरणक बाद सरकारक पुरा अभियान नगदी के रक्षा करबाक दिश केन्द्रित भS गेल अछि । नगदी बचेबाक चक्कर मे जे रियायत देल जा रहल अछि, ओहि सँ राजस्व पर जे अतिरिक्त भार बढ़तैक, की ओहि के हिसाब कयल जा रहल अछि जाहि सँ विमुद्रीकरणक सोझां प्रभाव रूपी हाथ आम आओर सामान्य लोकक जेबी मे जेतैक आओर सामान्य लोक के बुझबो मे नञि एतैन्ह जे हुनक बजट कोना गड़बड़ा गेल । मोदीजी के सनकक कारणें विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ देशक राजस्व पर टाकाक नुकसान होयत जे आई नञि काल्हि सरासर एक आर्थिक अपराधक श्रेणी मे मोदीजी के ठाढ़ करबाक लेल पर्याप्त अछि । विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ करिया धन पर किन्नहुँ तहिना प्रभाव नञि पड़तैक जहिना प्रेशर कुकर सँ बहराइत भाप पर पाइन ढ़ारलाक बाद प्रेशर कुकर पर कोनो  प्रभाव नञि पड़ैत छैक ।

जहिना जंगली घोड़ा के कटघड़ाक भीतर चाबुक मारि के सोझ कयल जाइत अछि तहिना करिया धनक  स्रोत पर प्रहार करब आवश्यक अछि । भारतीय अर्थव्यवस्था के चारूदिश सँ घेरि कS विमुद्रीकरणक डेग अगर उठायल जायत तS बेशी कड़गर आओर प्रभावी होयत । कुल मिला कय विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ भारतीय समाज नांगट भS जायत आओर विमुद्रीकरणक प्रभाव सँ भारत नञि उबड़ि सकत, कारण एहि सँ पूर्व मे जाहि देश मे विमुद्रीकरणक डेग उठाओल गेल ओ देश सब तरहें पछड़ि गेल अछि जकर प्रमाणिकता इतिहासक कालखंड मे आईयो देखबा मे आबि रहल अछि ।

राजकुमार झा.