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सहरसा। 02 नवम्बर। लोक आस्था केँ महापर्व "छठ पूजा" के अप्पन मिथिला म' अलगे महत्व अछि। ई एकमात्र एहेन पाबनि अछि जाहिमेँ डूबैत आर उगैत दुनु सूर्य देवता केँ पूजा कायल जायत अछि।

छठ पूजा केर किछ खास बात


  • सूर्य उपासना केँ इ पाबनि  कार्तिक मास केर चतुर्थी सँ सप्तमी तिथि धरी मनाओल जायत अछि। 
  • सूर्य षष्ठी व्रत होयबाक कारण एहि पाबनि क' 'छठ' कहल जायत अछि।  
  • मान्यता अछि कि छठ देवी सूर्य देव केर बहिन छथिन आर हुनके प्रसन्न करबाक लेल भगवान सूर्य केर अराधना कायल जायत अछि। 
  • छठ पाबनि केर शुरुवात "नहाय-खाय" सँ होयत अछि, जाहि दिन व्रती स्नान करि अरवा चाउर, बुटक दाइल आर साजमैन केँ तरकारी भोजन करैत छैथ।
  • नहाय-खाय केर दोसर दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी केँ दिनभरि  व्रती उपवास करि सांझ म' अरवा चाउर आर सक्कर सँ बनल खीर केँ प्रसाद ग्रहण करैत छैथ। एहि पूजा क' "खरना" कहल जायत अछि। 
  • अगला दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि क' उपवास राखी सांझ क' डाली म' ठेकुआ, फल, ईख समेत आन प्रसाद ल' पोखैर, तालाब, या आन जलाशय म' जे क' अस्ताचलगामी सूर्य क' अर्घ्य देल जायत अछि। 
  • ऐहिक अगला दिन यानी सप्तमी तिथि क' भोर म' उदीयमान सूर्य क' अर्घ्य अर्पित करि व्रत केर समापन कायल जायत अछि। 

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