भार साँठब (बीहनि कथा) - वी०सी०झा "बमबम" - मिथिला दैनिक

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सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

भार साँठब (बीहनि कथा) - वी०सी०झा "बमबम"

~ कि यउ विकल बाबू आय बड्ड फरिसान बूझि परैत छी ?
~ कि कहि कोजागरा'क भार साँठबा'क अछि ने !

~ ताहि मे एतेक बेकल होयवा'क कोन प्रयोजन ?
~ यउ भाई दिनानू - दिन वर पक्ष संऽ मांग बढ़ले जाइत अछि !

~ हँ से त हमहु इ सब वर पक्षक खेल खूब देख रहल छी ! पेट मे खड़ नहि आ टीक मे तेल चाहबे करी !
~ आब समय लगिचेलय तऽ कहैत छथि इ चाहबे करी ओ देबऽ परबे करत तखन फल्लां चिज सेहो चाहि हमर गांउ नम्हर अछि ! बारहो वरण हमरा ओतय अबैत अछि कम स कम दसो बोरा मखान नहि देव तऽ कोना हेतय समधि ?
एतय तेल सधल जाय आ नाच बढ़ल जाय बला परि छय !

~ धूर्र अहाँ बेकारे चिंता करैत छी ? विकल जूनि बेकल होथि ! जतेक सामर्थ्य अछि ततेक ओरियान करु आ ताहि संऽ फाजूल जाँउ हुनका करबाक वा नोतवाक हेतनि तऽ अपन व्यवस्था करता कि हुनक सब मनोरथ बेटीए बला पूर करौन ?
~ हमरा तऽ दूध - मांछ दुहू बांतर अछि ! हम बेटी बला छी हमरा तऽ आंगा पांछा दुहू देखय परैत अछि ! बेटी के भविष्य - - - -

~ तखन सोचैत रहु आ अपन डीह - डाबर बिकिन के ओकर मनोरथ पूरबैत रहु !
~ तखन दोसर उपाय कोन छय ! बेटी के जनेने छी तखन तऽ ओकर - - - -
आब उखैड़ मे मुह अछि तऽ समाठक चोट सहए परत ने

~ सुआइत लोक बेटी नहि होमऽ देमऽ चाहैत रहैत छैइक ! ओहऽऽऽ

   वी०सी०झा"बमबम"
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