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पटना। 30 सितंबर। नीतीश कुमार सरकार क' बड़का झटका लागल अछि। पटना हाई कोर्ट बिहार सरकार के शराबबंदी एक्ट क' 'गैरकानूनी' करार देलन्हि। अपने क' बता दी कि बिहार म' शराबबंदी लागू करब विधानसभा चुनाव केर समय सँ नीतीश कुमार केँ महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट चलल छल। जेडीयू केर थिंकटैंक एहि कानून केर सहारे नीतीश कुमार क' पूरा देश म' स्वीकार्यता बढेबाक मुहिम चला रहल छल।

बिहार सरकार एहि कानून क' आर बेसी सख्ती सँ लागू करबाक कोशिश म' छल। कानून म' इ प्रावधान सेहो छल कि अगर किनको घर घर म' शराब भेटत तेँ ओहि परिवार केर मुखिया क' जेल जाय परतैंह। अप्रैल म' आनल गेल एहि कानून के तहत राज्य म' शराब  बनेनाय, बेचनाय आर पीनाय सब पर रोक लगाओल गेल छल। कानून के तहत भेल कार्रवाई म' एखन धरी सात हजार लोग जेल जे चुकल छैथ।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एहि पहल के तहत आब दोसरो राज्य सभ म'  अप्पन पहुँच बढेबाक कोशिश करैत छलाह। ओ अपराध केर आंकड़ा केर जरिया सेहो अप्पन एहि फैसला क' सही मानैत छलाह। पुलिस दिस सँ  जारी आंकड़ा केर मुताबिक, राज्य म' पूर्ण शराबबंदी लागू भेलाक बाद सँ अपराध दर म' 27 प्रतिशत केर कमी दर्ज कायल गेल।

गौरतलब अछि कि बिहार म' शराबबंदी कानून केँ कैको संगठन विरोध केलनि। एहि सिलसिला म' कैको संस्था द्वारा पटना हाई कोर्ट म' याचिका दायर कराओल जेल छल। राज्य म' नाव उत्पाद नीति केर अनुरूप राज्य के दुनु सदन शराबबंदी विधेयक क' सर्वसम्मति सँ पारित केना छल। दुनु सदन सँ पारित भेलाक बाद राज्यपाल रामनाथ कोविंद सही एहि पर मोहर  लगा देना छलाह।

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