0
मामा आ सार पर केखनो विश्वास नहि करी । इतिहास गबाह अछि । नहि कोनो मामा भगिना के भेलै आ नहि कोनो सार बहिनोइ के भेलै । कंस, शकुनि, बंगाल रियासत केर बादशाह सिराजुदौल्लाक सार(मिर कासीम आ मिर साकी) , जायचन्द आ एहेन एहेन कतेको मामा आ सार घर-घरमे नुकेएल अछि । 

एकटा पूरान फकरा छै, जखन गिदड़के मौत अबै छै तँ ओ शहर दिस भागैत अछि । एहि फकराके आब एना बूझल जेए, जखन कोनो मनुखके बिपैत आबै बला होइ तँ ओ सासुर क भगैए वा सारके पोसैए । सार आ गहुमन साँपमे कोनो फराक नहि । ई दुनू कखन डैस लेत बिधने बुझता । आ जूएस गहुमन भेला मामा । (ई खालि हमर मंतव्य अछि जरूरि नहि जे अहुँ एकरा मानी । मामा अहाँके सार अहाँके जीवन अहाँके मर्ज़ी अहाँकेँ । हम तँ मात्र इतिहास आ अपन मंतव्य शेयर केलहुँ । 

© जगदानंद झा 'मनु' 

मिथिला दैनिक क' समाचार ईमेल द्वारा प्राप्त करि :

Delivered by Mithila Dainik

मिथिला दैनिक (पहिने मैथिल आर मिथिला) टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, पाठक लोकनि एहि जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य जालवृत्तक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव संगहि एहि जालवृत्त पर प्रकाशित करबाक लेल अपन रचना ई-पत्र द्वारा mithiladainik@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।

 
#zbwid-2f8a1035