गीत - मिथिला दैनिक

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गुरुवार, 5 नवंबर 2015

गीत

हमर करेजाकेँ एना धड़काबै छी किए
अहाँ दाँत तर ओढनी दबाबै छी किए
खिस्सा प्रेमक जानि गेल दुनिया
अप्पन सिनेहकेँ मानि गेल दुनिया
दुनियासँ ई खिस्सा नुकाबै छी किए
अहाँ दाँत तर................
रस भरल अछि अहाँकेँ ई मुस्की
मोनमे गड़ल अछि अहाँकेँ ई मुस्की
अप्पन मुस्की एना लुटाबै छी किए
अहाँ दाँत तर.............