गजल, अजय ठाकुर (मोहन जी) - मिथिला दैनिक

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शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

गजल, अजय ठाकुर (मोहन जी)

सब तरहक रंग में हम फिट भ गेलो
नेता सब दुनियां में गिरगिट भ गेले
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अफसर सब स ओ मिलत सिवाय जे
गेटकी पर लटकल होय चिट् भ गेले
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चोर-डाकू और लफंगा-उचक्का सेहो सब
सब के सब संसद में परमिट भ गेले
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"मोहन जी"हर युग में सदा सूली चढल
कातिल-झूठा के नारा मगर हिट भ गेले