भाषा क कोनो जाति या धर्म नहि होइत छैक : शाहनवाज - मिथिला दैनिक

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बुधवार, 11 नवंबर 2009

भाषा क कोनो जाति या धर्म नहि होइत छैक : शाहनवाज

पूर्व केंद्रीय मंत्री आ सांसद शहनवाज हुसैन कहला अछि जे मैथिली क उपेक्षा आब आओर नहि कैल जा सकैत अछि। अपन भावनाक सबस नीक जेकां व्यक्त करबा लेल मातृभाषा स नीक कोनो जरिया नहि होइत अछि। मातृभाषाक सम्मान केला स कोनो आन भाषाक विरोध या अपमान क सवाल नहि अछि। हुनक कहब छल जे मैथिलीक विकास स मिथिला आ बिहारक विकास संभव अछि। शाहनवाज हुसैन सोमदिन प्रेस क्लब ऑफ इंडियाक सभागार मे मैथिलीक पहिल इ पेपर क लोकार्पण करबाक बाद सभा कए संबोधित करैत छलाह।

हुसैन कहला जे बिहारक भाषाक रूप मे भेजपुरी फैइल रहल अछि। इ खुशीक गप अछि। मुदा मैथिली क इ पेपर समाद अबै वाला समय मे बिहार स बाहर रहनिहार लोक क इ धारणा बदलत जे बिहार मे मात्र भोजपुरी बाजल जाइत अछि। ओ कहला जे बिहारक अन्य बोलीक सेहो विकास हेबाक चाही। ओना जहां तक मैथिलीक सवाल अछि, इ भारतक सबस मीठ भाषा अछि, साहित्य समृद्ध अछि आइ अखबार सेहो निकलि गेल। आब समाद क जरिए मिथिला क्षेत्र क संस्कृति आ विचार क पहचान क दायरा पैघ होयत। शाहनवाज हुसैन कहला जे देश मे मिथिलांचल एकटा एहन क्षेत्र क रूप मे जानल जाइत अछि, जाहि ठाम धार्मिक छुआछूत नहि अछि।

ओ कहलथि जे कोनो भाषा क कोनो जाति या धर्म नहि होइत छैक आ एहि आधार पर भाष ककरो स कोनो विभेद सेहो नहि करैत अछि।करीब एक घंटा तक धाराप्रवाह मैथिली मे देल अपन संबोधन मे शाहनवाज हुसैन कहला जे देश मे मिथिलांचल एकटा एहन क्षेत्र क रूप मे जानल जाइत अछि, जाहि ठाम धार्मिक छुआछूत नहि नहि अछि।

एहि मौका पर पूर्व केंद्रीय मंत्री कहला ले अटल बिहारी वाजपेयी क प्रधानमंत्रित्वकाल मे मैथिली कए आठम अनुसूची मे शामिल करबेवा लेल काफी मेहनत करय पड़ल। संयोग स वाजपेयी सरकार मे शाहनवाज एक मात्र एहन कैबिनेट मंत्री छलाह जे मैथिली भाषी छलाह। अन्य बिहारी आ मैथिल मंत्रीक कहब छल जे भोजपुरी कए पहिने शामिल कैल जाए। शाहनवाज हुसैन कहलथि जे आब हमरा सब कए मिल कए भोजपुरी कए सेहो भाषाक दर्जा दिएबाक अछि।

हुसैन कहला जे राजधानी दिल्ली मे मैथिलक संख्या लाख से ऊपर अछिए एहन मे हमरा बस कए संगठित रूप स सामने एबाक चाही, जाहि मे समाद परिवार मदद करि सकैत अछि। हुसैन कहलथि जे ओ एकटा पैघ मैथिली सम्मेलन करेबाक योजना बना रहल छथि। जाहि मे मैथिली आ मिथिला स जुड़ल लोक कए एक ठाम अनबाक प्रयास कैल जाइत। ओ कहलथि जे एहि सम्मेलन क जरिए विभिन्न राजनेता, बुद्घिजीवी, अधिकारी, पत्रकार सहित समाज क अन्य लोक कए एकटा मंच पर अनबाक चाही।