रैतक कथा (मुखिया) - जितमोहन झा (जितू), - मिथिला दैनिक

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मंगलवार, 10 नवंबर 2009

रैतक कथा (मुखिया) - जितमोहन झा (जितू),

अपन कालक हम अपन गामक महान मुखिया रही, एहेन मुखिया जिनकर फैसला सँ पूरा ग्रामीणक मुह बंद भs जाइत रह्हन्नहि। हम जा धरि जीलहुँ ग्रामीण जनता -जनार्दनक बहुत भलाई केलहुँ। पूरा मिथिला मे एक हमरे गाम रहे जै मे सभ ग्रामीण जनता - जनार्दन केँ हमर सहयोगसँ बी.पी.एल कार्ड आ इन्द्राआवासक पाइ भेटल रहन्हि। जा धरि हम मुखिया रहलहुँ अपन गामक लेल बहुत नीक-नीक काज केलहुँ, जाहिसँ ग्रामीण जनता - जनार्दन हमरा गामक ताज मानैत रहथि....



हमरा मरलाक बाद ग्रामीण लोकनिक इच्छा भेलन्हि जे हमर एक प्रतिमा (मूर्ति)गामक चौराहा पर स्थापित कएल जाय, ओ सभ गामक चौराहा पर हमर मूर्ति स्थापित कए देलथि......



खूब जुलुस निकलल, बहुते लोग जमा भेल, सब हमरा बारे मे खूब जोर - सोरसँ भाषण देलन्हि, हमर किछु इच्छा (जे हमरो नै बुझल छल) तहीसँ सब जनता - जनार्दनके अबगत करेलकनि, खूब फूल - माला चढ़ल, जखन हमर दुश्मनों हमर तारीफ मे बढ़ि-चढ़ि कs हिस्सा लेलथि तँ हमरा बड ख़ुशी भेल ...



गामक चौराहा पर हमर मूर्तिक स्थापित भेल किछु दिन बीतल, एखन धरि गरदनिक फूलो नै सुखल छल की कतो - न - कतोसँ आबि के कौआ हमरा माथा पर बैसि कए चटैक देलक...... बहुत दुःख भेल तैयो बर्दास्त कएलहुँ, दोसरे दिन दुपहरक समय मे देखै छी एक बच्चा एम्हर उम्हर देखलक आ हमरा बगल मे छि......छि.........



जेना -तेना समय बीतल गेल, हमर हालत बद्दसँ बदतर भेल गेल, कुनसँ - कुन सित मे हमरा संग नै भेल, पशु - पंक्षी के तँ बाते छोरु.. जै जनता - जनार्दनक लेल हम की नै केलहुँ ओहो हमरा संग की नै की केलन्हि.......



भगवान एहेंन दिन किनको नै देखबन्हि, हम फूटि - फूटि कानैत छलो, अपन हालत देखि हरदम भगवानसँ हम एके विनती केलहुँ.... हे प्रभु हमरा मुक्ति दिअ.....मुक्ति दिअ.....



कहाबत अछि भगवानक घर देर छैन्ह.... अंधेर नै, एक दिन गामक भावी मुखिया केँ चौराहा पर हमर प्रतिमा रास नै एलैन ओ किछ आदमी के संग अपन राय मशवरा केलथि आ दोसरे दिन भोरे धरि ..... किछु लोग हाथ मे हथौरी (मरिया) खंती लेने हमर प्रतिमाक नजदीक आयल... जाबे धरि ओ सभ पहिलुक हथौरा चलेलक हमर निन्द खुजी गेल ......